ध्यान Dhyan Hindi
ध्यान गुरु, भारत , Meditation Guru, India
नींद ,आचेत ध्यान है |
ध्यान सहज नींद है |
नींद में हमें थोड़ी सी ही शक्ति मिमलती है |
ध्यान से भरपूर शक्ति मिलती है |
ये शक्ति हमारे शरीर की दिमाग की और बुद्धि की शक्ति बडाती है |
छठी इन्द्रि उजगर करते है . . .
और भी बहुत कुछ . . .
इस ध्यान से बढ़ी हुई शक्ति
से हम बिना तनाव के स्वस्थ
और सुख रह सकते है |
हमारी शक्ति बहुत बढ जाती
है |

ध्यान , हमारी चेतना स्वयम् कि ओर आने के सिवा कुछ नही है |
ध्यान से हम जानबूझकर
अपने शरीर से दिमांग तक जाते है ,
दिमांग से ज्नान , और ज्नान से स्वयम की ओर ,
और उससे भी आगे पहुंच जाते है |
ध्यान करने के लिये ,
हमे अपने शरीर की सारी हरकतों को बन्द करना पडता है ,
जैसे शरीर का हिलना , देखना , बॉलना और सोचना . . .
ध्यान कैसे करते है आइये देखते है . . .
ध्यान
ध्यान के लिये
पहला काम है . . . स्थिति |
आप किसी भी तरह बैट सकते है |
बैठना आरामदेह और निश्चल होना चाहिए |
हम ज़मीन और कुर्सि पर बैटकर ध्यान कर सकते हैं |
ध्यान हम किसी भी जगह कर सकते जहा हम सुखदायी हों |
आराम से बैठिए |
पैरों को मोडिऩ् उंगमियों को फंसाइए |
आंखे बन्द कीजिए |
अन्दर और बाहर की आवाजों पर रोक लगाइये |
किसी भी मन्त्र का उच्चारण नहीं कीजिए |
जब हम पैरों को मोड्ते है और उंगलियों को फंसा लेते हैं तो शक्ति का दायार बढ़ जाता है |
स्थिरता बढ़ जाती है |
आंखें दिमाग के द्वार हैं . . .
इसीलियें आंखें बन्द होनी चाहिए |
मन्त्रोच्चारण , कोई भी ध्वनियां - अन्दर या बाहर की . . . मन की क्रियाएं है |
इसलिये इन्हे बन्द करना होगा |
जब शरीर ढीला छोड़ दिया जाता है ,
चेतना दूसरे कक्ष में पहुंच जाती है . . .
मन और बुध्दि . . .
मन विचारों का समूह है |
बहुत से विचार हमारे मन में उभरते रहते हैं |
जब विचार आते हैं तो प्रश्न भी उठ खडें होते हैं . . .जाने और अनजाने |
मन और बुध्दि को भावातीत करने के लिए . . .
हमे अपनी संस पर ध्यान देना चाहिए . . .
अपने आप पर ध्यान देना हमारा प्रक्रुति है |
जान बूझकर सांस न लिजिए
जान बूझकर सांस न लिजिए न छोडिए |
सांस लेना या छोड्ना अनायास होना चाहिए |
प्राक्रुतिक सांस पर ध्यान दीजिए |
ये इसकी व्याख्या है . . . यही तरीका है . . .
विचारों का पीछा मत कीजिए . . .
विचारों , सवालों से चिपक मत जाइये . . .
विचारो को हटा दीजिये . . .
सांस पर पुनः ध्यान दीजिए . . .
सांस में खो जाइये |
इसके बाद . . .
सांसों की जगराई कम होती जाएगी . . .
धीरे धीरे सांस हल्कि और छोटी होती जाएगी . . .
आखिर में . . .
सांस बहुत छोटी हो जाएगी . . .
और दोनो भावों के बीच में चमक का रूप ले लेगी |
इस दशा में . . .
हर किसी में . . .
न सांस न रहेगी न विचार . . .
वो विचारों से परे हो जाएगा . . .
ये दशा कहलाती है . . .
निर्मल स्थिती या बिना बिचारों की दशा . . .
ये ध्यान की दशा है . . .
ये वो अवस्था है . . . जब हमपर विश्व शक्ति की बोछार होने लगती है |
हम जितना ज़्यादा ध्यान करेंगे उतना ही ज़्यादा विश् शक्ति हमे प्राप्त होगी |
विश् शक्ति प्राणमय शरीर की शक्ति में प्रावाह करती है |
शक्ति से भरा हुआ शरीर प्राणमय शरीर कहलाती है |

